पुनर्जागरण - नवजागरण या पुनर्जागरण का काल सन् 1350 ई ० से 1550 ई ० के बीच माना जाता है । यूरोप में आधुनिक युग का आरम्भ नवजागरण से माना जाता है । मध्यकाल में यूरोप के लोग सामन्ती प्रथा तथा ईसाई धर्म की रूढ़िवादिता से जकड़े हुए थे । इस युग में मनुष्य की स्वतंत्रता का कोई मूल्य नहीं था । प्राचीन ग्रन्थों के अध्ययनों ने मानववादी विचारधारा को जन्म दिया , जिसमें मनुष्य के जीवन और उसके सुख को महत्व दिया गया । धार्मिक क्षेत्र में ईसाई धर्म के प्राचीन सरल सिद्धान्तों के प्रति बढ़ा । क्षेत्रीय भाषाओं में बाइबिल का वाद किया गया । चौदहवीं शताब्दी से ही प्राचीन आदर्शों तथा सिद्धान्तों का प्रभाव कला , साहित्य , विज्ञान - दर्शन तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र पर पड़ने लगा । पन्द्रहवीं शताब्दी में कला और बौद्धिक क्षेत्र में ये परिवर्तन दिखलाई देने लगे । यही बौद्धिक चेतना अथवा विचारों की चेतना पुनर्जागरण या नवजागरण कहलाती है । पुनर्जागरण का आरम्भ इटली में हुआ । इस आन्दोलन में लोगों को स्वतंत्र चिन्तन के लिए प्रेरित किया । अब यूरोपवासी तर्क और अनुसंधान द्वारा रूढ़िवादी विचारों तथा रीति - रिवाजों के विरुद्ध आवाज उठाने लगे । अनुसंधान तथा प्रयोगों का महत्व बढ़ा । अंग्रेज वैज्ञानिक रोजर बेकन ने ( सन् 1214 ई ० से सन् 1294 ई ० ) कहा कि अनुभव तथा प्रयोग द्वारा ही सच्चे ज्ञान और सत्य को जाना जा सकता है । यह नई पद्धति ही " वैज्ञानिक पद्धति " कहलाती है । वैज्ञानिक पद्धति आधुनिक विज्ञान और आविष्कारों की जननी बनी । इस प्रकार नवजागरण ने तर्क और विवेक की स्थापना की तथा मध्यकालीन धार्मिक विचारधाराओं और रूढ़िवादी परम्पराओं को समाप्त कर दिया । MD SHAHWAN SHAHIDI
आधुनिक भारत इस के अन्दर मैं भारत का इतिहास के लिखने की कोशिश की है और यह सब कुछ साठीक और साफ़ तारीखा से की गई है और वह अपने घर के लिए कुछ भी नहीं मैं चाहता हूं कि हमारे देश के बच्चों इस से पड़ने वाले और प्रभावशाली बन सके
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ek sadhu ne piyas bujhayi
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