Wednesday, January 13, 2021

आधुनिक भारत जिस में मौलिक अधिकार प्राप्त है

 पोप के प्रभाव को कम करना था । इस आन्दोलन से गजाओं की शक्ति में वृद्धि हुई तथा व्यपार को प्रोत्साहन मिला । उपनिवोशों की स्थापना भौगोलिक खोजों में पुर्तगाल सबसे आगे था । सन् 1415 ई ० में सर्वप्रथम पुर्तगाल ने अफ्रीका के समुद्रतट स्थित सीट नामक स्थान पर अधिकार कर लिया । किसी यूरोपीय देश के द्वारा प्रथम बार अपने से भिन्न जाति , धर्म और संस्कृति के लोगों पर अधिकार किया गया । भिन्न प्रजाति पर राजनीतिक और आर्थिक प्रभुत्व की स्थापना को ही उपनिवेश की स्थापना कहा जाता है । सन् 1498 ई ० में वास्कोडिगामा भारत पहुंचा । भारत में गोआ , दमन और ड्यु पर पुर्तगालियों ने अधिकार किया । इसके साथ - साथ अमोय तथा मालक्का पर भी उन्होंने अपना प्रभाव स्थापित किया । इस प्रकार यूरोप में उपनिवेशवाद का जन्म हुआ । उपनिवेश का अर्थ होता है , दूर के प्रदेशों तथा अपने से भिन्न जाति पर अधिकार करना और उन पर शासन करना । पुर्तगाल की तरह स्पेन ने भी दक्षिण अमेरिका के प्रदेशों पर अधिकार कर लिया तथा उपनिवेश की स्थापना को । वे फिलीपिन्स पर भी अधिकार करने में सफल हुए । धीरे - धीरे इंगलैण्ड , फ्रांस , हॉलैण्ड , इटली आदि देश भी भौगोलिक खोजों में सम्मिलित हो गए । उत्तरी अमेरिका में इंगलैण्ड तथा फ्रांस ने उपनिवेश स्थापित किए । इंगलैण्ड ने 13 बस्तियाँ बसाई तथा कनाडा और लूसियाना पर फ्रांस के उपनिवेशा ख्या नगरों पर के कुशल जनीति स्थापित हुए । स्थानीय कानून से क अर्थ विचारों इतिहास लए राज्यों य राज्यों स्त किया । जाओं को उपनिवेशों की लूट : नवीन खोजों का एकामत्र उद्देश्य था , व्यापारिक लाभ कमाना । पुर्तगाल ने गर्म मसालों तथा एशियाई व्यापार पर एकाधिकार स्थापित कर लिया । स्पेन ने दक्षिणी अमेरिका के प्रदेशों का शोषण करना आरम्भ कर दिया । पुर्तगाल ने अफ्रीका के नीग्रो दासों का घृणित व्यापार करना आरम्भ कर दिया । स्पेन के दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों को खदेड़ दिया और उनकी जमीन पर अधिकार कर लिया । इंगलैण्ड और फ्रांस ने भी उत्तरी अमेरिका में यही नीति अपनाई । यूरोप के लोग इन नए प्रदेशों में जाकर बसने लगे । उन्होंने वहाँ के लोगों को अपने अधीन कर लिया । स्पेन में दक्षिणी अमेरिका से सोना - चांदी आने लगा । स्पेन ने दक्षिणी अमेरिका के सोना - चांदी के खानों पर अधिकार कर लिया । थोड़े ही समय में स्पेन यूरोप का सबसे धनी देश बन गया । व्यापारिक प्रगति से इन देशों के व्यापारियों के पास पूँजी का संग्रह हुआ । इस पूँजी को उन्होंने अन्य उद्योगों में लगाया है । वे अपने - अपने उपनिवेशों से कच्चा माल मंगाने लगे । तैयार माल को इन उपनिवेशों में बेचने लगे । प्रशासनिक और अर्थिक क्षेत्र में उपनिवेशों पर इनका नियंत्रण बढ़ गया । अमेरिका का स्याता संगर्ष - इंगलैण्ड ने उत्तरी अमेरिका में 13 बस्तियाँ बसाई । इन उपनिवेशों के लोग इंगलैण्ड से आए थे । इन अंग्रेजों को वे अधिकार नहीं थे , जो इंगलैण्ड में अंग्रेजों को प्राप्त थे । वे लोग कारखानों की स्थापना नहीं कर सकते थे । यहाँ से इंगलैण्ड कच्चा माल मंगाता था तथा तैयार किया हुआ माल इन उपनिवेशों में भेजता था । उपनिवेशवासी अन्य देशों के साथ व्यापार नहीं कर सकते ये । अंग्रेज सरकार इनसे अनेक तरह का कर लेती थी । उन पर कर का बोझ बढ़ता गया । सरकारी नौकरियों में भी उन्हें ऊंचे पदों पर नियुक्त नहीं किया जाता था । उपनिवेशवासी स्वतंत्रता के पुजारी थे । ये लोग यूरोप के प्रसिद्ध दार्शनिकों के सिद्धान्तों से प्रभावित थे । इन दार्शनिकों का विचार था कि मनुष्य को कुछ मौलिक अधिकार प्राप्त हैं , जिन्हें कोई भी सरकार नहीं छीन सकती है । अन्याय के विरुद्ध विरोध कारना ऐसा हो अधिकार था । इसी उद्देश्य से उपनिवेशों की एक सभा फिलाडेलफिया में आयोजित की गयी । 4 जुलाई , सन् 1776 ई ० को तेरह उपनिवेशों के प्रतिनिधियों ने सारे संसार के सामने " स्वतंत्रता की घोषणा " की । इस " घोषणा - पत्र " को जेफर्सन ने तैयार किया था । इन प्रतिनिधियों ने सभी उपनिवेशों को मिलाकर " संयुक्त राज्य अमेरिका " के नाम से एक नए राष्ट्र की स्थापना की घोषणा की । इस घोषणा के बाद जॉर्ज वाशिंगटन के नेतृत्व में उपनिवेशवासियों ने संघर्ष आरंभ कर दिया । यह युद्ध सन् 1776 ई ० से सन् 1783 ई ० तक चला । उपनिवेशवासी विजयी रहे । इस नए देश में लोकतंत्र की स्थापना की गई । जॉर्ज वाशिंगटन " संयुक्त राज्य अमेरिका " के प्रथम राष्ट्रपति बने । फास की राज्य - क्रांति सोलहवीं शताब्दी में यूरोप में राष्ट्रीय राज्यों का उदय हुआ । इन राज्यों में फ्रांस एक प्रमुख राज्य था । फ्रांस के शासक निरंकुश थे । उन पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं था । कानून बनाना , उनको लागू करना , निर्णय देना , सभी अधिकारियों को नियुक्त करना आदि अधिकार उसे प्राप्त थे । उसकी शक्ति पर किसी का अंकुश नहीं था । फ्रांस का समाज तीन वर्गों में बंटा हुआ था पादरी वर्ग , सामन्त वर्ग तथा साधारण वर्ग । पादरियों तथा सामन्तों को विशेष अधिकार प्राप्त थे । सर्वसाधारण वर्ग को कोई अधिकार नहीं था । सामन्तों के पास बड़ी - बड़ी जागीरें थीं । चर्च की जागीरें भी बड़ी - बड़ी थीं । किन्तु इन्हें कर नहीं देना पड़ता था । तीसरे वर्ग जिसमें किसान और मजदूर थे , करों के बोझ से दये हुए थे । मध्यम वर्ग को भी कोई अधिकार नहीं था । फ्रांस का शासक लुई सोलहयाँ अयोग्य था । राजा - रानी फिजूल खर्च करते थे । कई तरह के कानून थे तथा न्याय - प्रणाली दोषपूर्ण थी । जनता का असंतोष बढ़ रहा था । फ्रांस के दार्शनिकों के क्रांतिकारी विचारों ने जनता का मार्गदर्शन किया । उन्होंने अत्याचारी शासन का अन्त करने का निश्चय किया । जनता के प्रतिनिधियों ने अपने को फ्रांस की " राष्ट्रीय असेम्बली " के रूप में संगठित कर लिया । 14 जुलाई , सन् 1789 ई ० को पेरिस की जनता ने वैस्टाइल दुर्ग को तोड़ दिया । इस घटना के साथ ही क्रांति का आरम्भ हो गया । राष्ट्रीय - सभा ने " मनुष्य और नागरिक के अधिकारों " का घोषणा - पत्र पारित किया । इस घोषणा - पत्र में कहा गया कि " सभी मनुष्यों को जन्म में ही स्वतंत्रता तथा समानता के अधिकार जीवनभर के लिए प्राप्त हैं । " इस क्रांति ने फ्रांस में राजतंत्र का अन्त कर दिया और फ्रांसीसी गणराज्य की स्थापना हुई । इस क्रांति ने स्वतंत्रता , समानता और बन्धुव के सिद्धान्तों को लोकप्रिय बनाया । 14 जुलाई के दिन फ्रांस प्रतिवर्ष राष्ट्रीय दिवस मनाता है । अमेरिका और फ्रांस की राज्य - क्राति ने राष्ट्रीय , संगठन और लोकतंत्र की विचारधाराओं को लोकप्रिय बनाया । उन्नीसवीं शताब्दी में पोलैण्ड , यूनान , इटली तथा जर्मनी ने राष्ट्रीय एकता के लिए संघर्ष किया । उन्नीसवीं शताब्दी के अन्त में एशिया के देशों में इन क्रातियों के आदर्शों का प्रचार हुआ । वे विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष करने लगे । शब्दों के अर्थ : नवजागरण या पुनर्जागरण - सन् 1350 ई ० से सन 1550 ई ० के मध्य यूरोप के प्राचीन आदर्शों तथा साहित्य और दर्शन का पठन - पाठन लोकप्रिय हुआ । इससे मध्यकाल के रूढ़िवादी विचारों तथा रीति - रिवाजों की सत्यता को तर्क और प्रयोगों द्वारा परखा जाने लगा । विचारों के क्षेत्र में इस परिवर्तन को ही नवजागरण या पुनर्जागरण कहते हैं । राष्ट्रीय राज्य - समान संस्कृति , रीति - रिवाज , एक भाषा बोलनेवाले तथा एक निश्चित भू भाग में रहनेवाले लोग । उपनिवेश - अपने से भिन्न जाति पर आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव स्थापित करना ।

No comments:

Post a Comment

ek sadhu ne piyas bujhayi

दोस्तों यह कहानी है एक साधु और एक कवार लड़की की यह एक खौफनाक जंगल की दास्तान है जहां एक बढ़ा साधु अपनी झोंपड़ी में रहता था इस कहानी की असल श...