Friday, January 8, 2021

आधुनिक भारत 3

 और उसके सुख को महत्व दिया गया धार्मिक क्षेत्र में ईसाई धर्म के प्राचीन सरल सिद्धान्तों के प्रति आकर्ष । बढ़ा । क्षेत्रीय भाषाओं में बाइबिल का आवाद किया गया । चौदहवीं शताब्दी से ही प्राचीन आदर्शों तथा सिद्धान्तों का प्रभाव कला , साहित्य , विज्ञान - दर्शन तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र पर पड़ने लगा । पन्द्रहवीं शताब्दी में कला और बौद्धिक क्षेत्र में ये परिवर्तन दिखलाई देने लगे । यही बौद्धिक चेतना अथवा विचारों की चेतना पुनर्जागरण या नवजागरण कहलाती है । पुनर्जागरण का आरम्भ इटली में हुआ । इस आन्दोलन में लोगों को स्वतंत्र चिन्तन के लिए प्रेरित किया । अब यूरोपवासी तर्क और अनुसंधान के द्वारा रूढ़िवादी विचारों तथा रीति - रिवाजों के विरूद्ध आवाज उठाने लगे । अनुसंधान तथा प्रयोगों का महत्व बढ़ा । अंग्रेज वैज्ञानिक रोजर बेकन ने ( सन् 1214 ई ० से सन् 1294 ई ० ) कहा कि अनुभव तथा प्रयोग द्वारा ही सच्चे ज्ञान और सत्य को जाना जा सकता है । यह नई पद्धति ही " वैज्ञानिक पद्धति " कहलाती है । वैज्ञानिक पद्धति आधुनिक विज्ञान और आविष्कारों की जननी बनी । इस प्रकार नवजागरण ने तर्क और विवेक की स्थापना की तथा मध्यकालीन धार्मिक विचारधाराओं और रूढ़िवादी परम्पराओं को समाप्त कर दिया । भौगोलिबा खोजें - कुस्तुन्तुनिया पर तुर्कों का अधिकार हो जाने से यूरोप का एशियाई देशों के साथ व्यापार बंद हो गया । इस वियज के कारण यूरोप से पूर्वी देशों को जानेवाले स्थल भाग पर अब तुर्को का अधिकार हो गया । भूमध्य सागर के मार्ग से होनेवाला व्यापार अरब व्यापारियों के माध्यम से होता था । यूरोप के व्यापारी जलमार्ग द्वारा एशियाई देशों के साथ व्यापार करना चाहते थे । यूरोप के नाविकों तथा नौचालकों ने एशिया के देशों में पहुँचने के लिये समुद्री मार्गों की खोज की । पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी ( सन् 1394 ई ० से सन् 1460 ई ० ) ने खोज यात्राओं को प्रोत्साहन दिया । स्पेन के शासकों ने भी खोज - यात्राओं में रूचि ली । हेनरी ने सुदृढ़ नावों का निर्माण कराया । कुतुबनुमा का आविष्कार इटली का प्रसिद्ध यात्री पाको पोलो कर चुका था । कुतुबनुमा के आविष्कार से खोज यात्राएँ सरल हो गई । स्पेन के राजा की आर्थिक सहायता से कोलम्बस ने पश्चिमी मार्ग से भारत पहुंचने का प्रयत्न किया । वह सन् 1492 ई ० में अपनी यात्रा पर निकला । सन् 1494 ई ० में वह एक नए देश में पहुंचा , जो अमेरिका के नाम से प्रसिद्ध है । इस प्रकार कोलम्बस ने एक नए महाद्वीप की खोज की , जो अभी तक अज्ञात था । सन् 1498 ई ० में वास्कोडिगामा भारत पहुंचा । 16 वीं शताब्दी के अन्त तक यूरोप के साहसिक नाविकों ने विश्व के विभिन्न क्षेत्रों की खोज की । व्यापारिक प्रगति - नयी खोजों के कारण यूरोप के देशों के व्यापार में बहुत वृद्धि हुई । इन खोजों से इनका भारत , दक्षिणी और उत्तरी अमेरिका , चीन , जापान , श्रीलंका , मसालों के द्वीप - समूह तथा अफ्रीका के साथ व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित हुआ । इससे विश्व की दूरी घट गई तथा सभी देश एक - दूसरे के निकट सम्पर्क में आने लगे । व्यापार के सिलसिले में वे पूर्वी देशों के ज्ञान - विज्ञान से परिचित हुए । यूरोप में नगरों की संख्या बढ़ी । ये नगर या तो व्यापारी मार्गों पर बसें थे या समुद्र और नदी के उन तटवर्ती स्थानों पर बसे हुए थे , जो व्यापार की दृष्टि से सुविधाजनक थे । इन नगरों की स्थापना व्यापारिक महत्व के कारण हुई , अत : नगरों में रहनेवाला व्यापारी समुदाय वहाँ का सबसे प्रमुख वर्ग बन गया । इन नगरों के स्वतंत्र वातावरण में नए विचारों , साहित्य तथा कला को प्रोत्साहन मिला । सामन्तों का महत्व घटने लगा । समाज और सरकार के व्यापारियों को उच्च पद प्राप्त हुए । इस प्रकार यूरोप के मध्यम वर्ग का उदय हुआ । धीरे - धीरे कुशल कारीगर , निर्माता तथा शिक्षित समुदाय भी इस वर्ग में सम्मिलित हो गया । यूरोप के समाज और राजनीति में मध्यम वर्ग का महत्व बढ़ने लगा । राष्ट्रीय राज्यों का उदय- मध्यकाल में यूरोप के राजाओं के हाथों में बहुत कम शक्ति थी । स्थानीय सामन्ती सरदार अत्यधिक शक्तिशाली बन गए थे । आर्थिक और सैनिक क्षेत्रों में राजाओं को इन सामन्तों पर निर्भर रहना पड़ता था । एक ही देश के एक प्रदेश के कायदे - कानून दूसरे प्रदेश के कायदे - कानून से भिन्न थे । राज्यों की सीमाएँ बदलती रहती थीं । मध्यकाल में " राष्ट्र " और " राष्ट्रीयता " के आधुनिक अर्थ से यूरोपवासी परिचित नहीं थे । क्षेत्रीय भाषाओं की साहित्यिक रचनाओं तथा पुनर्जागरण काल के नए विचारों से प्रभावित होकर एक निश्चित भू - भाग में रहनेवाले लोगों , जिनका अपना एक लम्बा और निश्चित इतिहास था , जो समान भाषा बोलते थे , ने अपने को एक राष्ट्र का नागरिक मानना शुरू कर दिया इन नए राज्यों को ही " राष्ट्रीय राज्य " कहा जाता है । यूरोप में इंगलैण्ड , फ्रांस , स्पेन , रूस आदि का उदय राष्ट्रीय राज्यों के रूप में हुआ । इन्होंने गोला , बारूद तथा मध्यम वर्ग की सहायता से सामन्तों की शक्ति को समाप्त किया । देश में व्यवस्था और शान्ति की स्थापना की तथा व्यापार को प्रोत्साहन दिया । इन राज्यों के राजाओं को अत्यधिक शक्ति प्राप्त थी । धर्म - सुधार आन्दोलन - आधुनिक यूरोप के निर्माण में धर्म - सुधार आन्दोलन का एक महत्वपूर्ण स्थान है । मध्यकाल के अन्त तक ईसाई धर्म में अनेक बुराइयाँ आ गयीं थी । पोप अपने आपको ईश्वर का प्रतिनिधि समझने लगा था । लोग उसके प्रत्येक आदेश का पालन करते थे । पापों से मुक्ति के लिये वह " क्षमा - पत्र " बेचता था । चर्च बुराइयों का अड्डा बन गया था । पोप राजनीतिक मामलों में भी हस्तक्षेप करता था । नवजागरण आन्दोलन ने अन्धविश्वासों को समाप्त कर दिया । लोग पोप और चर्च को संदेह की दृष्टि से देखने लगे । 16 वीं शताब्दी में जर्मनी के निवासी मार्टिन लूथर ने चर्च और पोप के भ्रष्टाचार के विरूद्ध आन्दोलन किया । इस आन्दोलन का उद्देश्य ईसाइयों के जीवन का नैतिक उत्थान करना और

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