के नाम से जाना जाता है । यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों ने इससे लाभ उठाया और वे भारत से जाना जाता है । यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों ने इससे लाभ उठाया और वे भारत की राजनीति में हस्तक्षेप करने लगे । इन व्यापारियों में अंग्रेज व्यापारी , जो इंगलैंड से आए थे , भारत में अपना साम्राज्य स्थापित करने में सफल रहे । अंग्रेजों की राजनीतिक प्रभुता की स्थापना के बाद हम उनके निकट सम्पर्क में आए । अंग्रेजी शिक्षा , पश्चिमी ज्ञान - विज्ञान के प्रसार तथा पाश्चात्य संस्कृति के सम्पर्क ने हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया । परिवर्तन की यह प्रक्रिया अठारहवीं शताब्दी के उतरार्द से आरम्भ हुई । अत : आधुनिक भारत का आरम्भ बिन्दु सन् 1757 ई ० से माना जाता है । आधुनिक शब्द का अर्थ है - वर्तमान । प्राचीन तथा मध्यकाल के इतिहास की घटनाओं से हमारा निकट का सम्पर्क नहीं है । इन कालों के भारत के इतिहास के अध्ययन के लिये हमें पुरातात्विक साधनों , पत्थरों पर ऑकत अभिलेखों , भवनों , मंदिरों , मस्जिदों , पुस्तकों तथा दस्तावेजों का सहारा लेना पड़ता है । आधुनिक काल की घटनाओं से हमारा अधिक निकट का सम्बन्ध है । भारत के आधुनिक काल का इतिहास लिखने के लिये अभिलेखागारों में सोत - सामग्रियाँ , सरकारी अभिलेख आदि को पूर्ण रूप से सुरक्षित रखा गया है । इनके अतिरिक्त यूरोपीय और भारतीय इतिहासकारों की रचनाएँ भी आधुनिक भारत के इतिहास के अध्ययन की सामग्रियाँ हैं । पटना स्थित बिहार अभिलेखागार में तुम ईस्ट इंडिया कम्पनी तथा ब्रिटिश सरकार के अधीन बंगाल मुबा तथा भारत की प्रशासनिक , सामाजिक और आर्थिक नीतियों की जानकारी प्राप्त कर सकते हो । आज भी पूरे भारतवर्ष में अनेक व्यक्ति हैं जिन्होंने स्वाधीनता संग्राम में भाग लिया है । भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए वे जीवित स्रोत हैं । ( क ) यूरोप में आधुनिक युग का आगमन आधुनिक भारत के इतिहास के अध्ययन के पूर्व यह जानना आवश्यक है कि ये कौन से मुख्य तत्व थे , जिनके कारण यूरोप में आधुनिक युग का आगमन संभव हो सका और जो आधुनिक भारत के निर्माण में सहायक सिद्ध हुए । यूरोप में तेरहवीं - चौदहवीं शताब्दियों में ही बौद्धिक , व्यापारिक , राजनीतिक आदि क्षेत्रों में परिवर्तन के लक्षण आरम्भ हो चुके थे । इन शताब्दियों में यूरोप में विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई , जिनमें धर्मशास्त्रों का अध्ययन प्राचीन आदर्शों के आधार पर किया जाने लगा । मध्यकाल में यूरोप में लगभग चार शताब्दियों तक ईसाइयों तथा मुसलमानों के बीच युद्ध हुए इन युद्धों में यूरोप के देश एशिया के सम्पर्क में आए । इस सम्पर्क से एशिया का ज्ञान - विज्ञान आदि यूरोप में फैला । अरब व्यापारियों से इनको चीन के बारूद , भारत की दशमलव प्रणाली , चीन की मुद्रण प्रणाली आदि की जानकारी हुई । इनके व्यापार में भी प्रगति हुई । सन् 1453 ई ० में कुस्तुन्तुनिया पर सल्जक तुकों का अधिकार हो गया । ये तुर्क लोग इस्लाम धर्म के अनुयायी थे । कुस्तुन्तुनिया पूर्वी रोमन सामान्य का प्रमुख केन्द्र था । यह विद्या का भी केन्द्र था । तुर्को के अधिकार के बाद कुस्तुन्तुनिया के विद्वान इटली के नगरों तथा यूरोप के अन्य देशों में चले गए । वे अपने साथ प्राचीन और रोमन और लैटिन ग्रन्थों को भी लेकर गए । यूरोप के विद्वान , जब इनके सम्पर्क में आए , तो उनमें नवजागरण आया । पुनर्जागरण - नवजागरण या पुनर्जागरण का काल सन् 1350 ई ० से 1550 ई ० के बीच माना जाता है । यूरोप में आधुनिक युग का आरम्भ नवजागरण से माना जाता है । मध्यकाल में यूरोप के लोग सामन्ती प्रथा तथा ईसाई धर्म की रूढ़िवादिता से जकड़े हुए थे । इस युग में मनुष्य की स्वतंत्रता का कोई मूल्य नहीं था । प्राचीन ग्रन्थों के अध्ययनों ने भानववादी विचारधारा को जन्म दिया , जिसमें मनुष्य के जीवन
आधुनिक भारत इस के अन्दर मैं भारत का इतिहास के लिखने की कोशिश की है और यह सब कुछ साठीक और साफ़ तारीखा से की गई है और वह अपने घर के लिए कुछ भी नहीं मैं चाहता हूं कि हमारे देश के बच्चों इस से पड़ने वाले और प्रभावशाली बन सके
Friday, January 8, 2021
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ek sadhu ne piyas bujhayi
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साम्राज्यवाद : सोलहवीं - सत्रहवीं शताब्दी में यूरोप के देशों ने व्यापार की प्रगति के लिए उपनिवेश की स्थापना की थी । एशिया के देशों के साथ ...
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