Friday, January 8, 2021

आधुनिक भारत

 भारत और आधुनिक विश्व मानव के सामूहिक क्रियाकलापों के कारण समाज , अर्थ - व्यवस्था तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों में निरंतर परिवर्तन होता रहता है । परिवर्तन की यह प्रक्रिया जब अधिक गतिशील होती है , उसके प्रभाव सभी क्षेत्रों में स्पष्ट पड़ने लगते हैं । ऐसी स्थिति में मानव सभ्यता एक युग से दूसरे युग में प्रवेश करती है । परिवर्तनों का आरम्भ पहले युग में अंतिम काल से होने लगता है । प्राचीन तथा मध्यकाल में परिवर्तन की गति मन्द थी , आधुनिक काल में परिवर्तन की गति तीव्र रही है । प्राचीन तथा मध्यकाल के अन्तर को स्पष्ट करनेवाले कारणों से तुम परिचित हो । कक्षा -6 तथा कक्षा -7 में तुम भारत के प्राचीन तथा मध्यकाल का इतिहास पढ़ चुके हो । इससे तुम्हें जानकारी मिल चुकी है कि पूर्व युगों में भी भारत का इतिहास अन्य देशों की घटनाओं तथा उनके सम्पकों से प्रभावित रहा है । भारत का आधुनिक काल का इतिहास , आधुनिक विश्व - इतिहास का ही एक अंग है । आधुनिक भारत पश्चिमी सम्पर्क का परिणाम है । भारत का प्राचीन काल से ही पश्चिमी देशों के साथ व्यापारिक सम्बन्ध था । सिकन्दर के आक्रमण के बाद तथा मौर्यवंश के शासन काल से पश्चिमी व्यापार में वृद्धि हुई । मध्यकाल में अरब के व्यापारियों के माध्यम से यह व्यापार होता था । सन् 1498 ई ० में पुर्तगालवासी वास्कोडिगामा भारत पहुंचा । लगभग एक सौ वर्षों तक भारत के यूरोपीय व्यापार पर पुर्तगालियों का एकाधिकार रहा । सन् 1526 ई ० में बाबर ने भारत में शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की स्थापना की । सत्रहवीं शाताब्दी में यूरोप के विभिन्न देशों की व्यापारिक कम्पनियों ने भारत के साथ व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित किया । इस व्यापार से भारत में यूरोप से सोना - चाँदी लगा । यूरोप के बाजारों में भारत के गर्म मसाले , रेशम , सूती - वस्त्र , मखमल , मोती , सुगन्धित द्रव्य तथा बहुमूल्य पत्थरों की अत्यधिक मांग थी । वे सोना - चाँदी देकर इन वस्तुओं को खरीदते थे । सन् 1707 ई ० में औरंगजेब की मृत्यु हो गई । उसकी मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य तेजी से बिखरने लगा । औरंगजेब के बाद जो मुगल बादशाह गद्दी पर बैठा , उन्हें परवर्ती मुगल कहते हैं । परवर्ती मुगल काल के बादशाह दुर्बल थे । केन्द्रीय शासन कमजोर था । इनकी कमजोरियों के कारण ही अठारहवीं शताब्दी में हमारा देश अनेक टुकड़ों में बँट गया । उनमें कई प्रदेश लगभग स्वतंत्र हो गए । इस काल में दिल्ली के राज सिंहासन पर अनेक बादशाह गद्दी पर बैठे । केन्द्र में अस्थिरता की स्थिति बनी रही । सन् 1720 ई ० में मुहम्मद शाह बादशाह बना । मुहम्मद शाह ने सन् 1748 ई ० तक कुल 29 साल शासन किया । उसके काल में भी मुगल साम्राज्य का विघटन जारी रहा । धीरे - धीरे भारत में अनेक अर्द्ध - स्वतंत्र राज्यों का उदय हुआ जो मुगल बादशाह के प्रति केवल औपचारिक निष्ठा निभाते थे । इन राज्यों के शासक राज्य विस्तार के लिए परस्पर लड़ते रहते थे । वे ईर्ष्या और द्वेष के कारण भी आपस में लड़ते थे । इन संघर्षों ने राजनीतिक अराजकता को स्थिति उत्पन्न कर दी । शासन की कमजोरी से जनजीवन तथा सम्पत्ति असुरक्षित हो गई । भारत के इतिहास का यह काल ‌संक्मण काल या परिवर्तन काल

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