औद्योगिक क्रान्ति :
यह तुम जान चुके हो कि व्यापार से यूरोप के राज्य अत्यन्त धनी हो गए थे । अतः आन्तरिक मांगों में निरन्तर वृद्धि हो रही थी । इसके अतिरिक्त अठारहवीं शताब्दी तक यूरोप के देशों ने अफ्रीका और एशिया के विभिन्न देशों पर भी अपना प्रभाव स्थापित कर लिया था । उनके लिये बाहर में भी बड़ा बाजार उपलब्ध था । बाजारों की मांगों को पूरा करने के लिये अधिक - से - अधिक वस्तुओं के उत्पादन करने की आवश्यकता थी । पूँजीपतियों ने बढ़ती हुई माँग की पूर्ति के लिये उत्पादन प्रणाली में सुधार को आवश्यक समझा , जिससे कम समय में ज्यादा उत्पादन किया जा सके । इनके नाम उपनिवेश थे । वे अपने उपनिवेशों से कच्चा माल मंगा सकते थे । सामान्य औजार और कारीगरों से अधिक से अधिक वस्तुओं का उत्पादन नहीं किया जा सकता था । अत : अठारहवीं शताब्दी में घरेलू उद्योगों का स्थान कारखाना प्रणाली ने ले लिया ।
अठारहवीं शताब्दी में उत्पादन के क्षेत्र में परिवर्तन का आरम्भ इंगलैण्ड में हुआ । सन् 1733 ई ० में " जॉन के " नामक एक अंग्रेज ने कपड़ा बुनने के लिए " फ्लाइंग शटल " का आविष्कार किया । इस मशीन की सहायता से जुलाहे कम समय में अधिक वस्त्रों का उत्पादन करने लगे । सन् 1765 ई ० में जेम्स हारगोब्ज ने " स्पिनिंग जेनी " नामक मशीन का आविष्कार किया , जिसमें सूत कातने के लिए आठ तकलियाँ होती थी । स्पिनिंग जेनी द्वारा काता गया सूत कच्चा होता था और बुनते समय सूत टूट जाता था । इस कमी को दूर करने के लिये सन् 1769 ई ० में रिचर्ड आर्कराइट ने जल कर्जा से चलनेवाली मशीन का आविष्कार किया । इस मशीन का नाम वाटर फ्रेम था । इसमें बहुत से बेलन लगे होते थे । इस मशीन का प्रयोग करने के लिए अधिक स्थान की आवश्यकता थी । कारखाना प्रणाली का जन्म इसी मशीन के कारण हुआ । इन आविष्कारों के कारण इंगलैण्ड में सूती वस्त्र के उत्पादन में खस वृद्धि हुई । धीरे - धीरे कोयला और लोहा उद्योग में भी परिवर्तन होने लगे । जेम्स वाट ने एक ऐसी मशीन का आविष्कार किया जो भाप से चलती थी । उत्पादन के साधनों के इसी परिवर्तन को औद्योगिक क्रांति कहते हैं औद्योगिक क्रान्ति सर्वप्रथम इंगलैण्ड में हुई । इसके पास अच्छे बन्दरगाह थे । इंगलैण्ड में अनेक नदियाँ हैं । नदियों के निकट ही कोयले और लोहे की खानें थीं । पूँजीपतियों को मजदूर भी आसानी से प्राप हो जाते थे । सत्रहवीं शताब्दी में यूरोप के अन्य देशों की जनसंख्या घट गई थी , किन्तु रंगलेप को जनसंख्या निरन्तर बढ़ रही थी । इसके पास उपनिवेश भी अन्य यूरोपीय देशों से अधिक थे इंगलैण्ड में शान्ति और व्यवस्था उत्तम थी । अत : औद्योगिक क्रांति सर्वप्रथम इंगलैण्ड में हुई । धीरे - धीरे इसका प्रसार पूरोप के अन्य देशों में भी हुआ । औद्योगिक क्रांति का प्रथम प्रभाव उत्पादन पर पड़ा । मशीनों की सहायता से कम समय में अधिक उत्पादन होने लगा । घरेलू उद्योग - धंधे नष्ट हो गए थे । लोग नौकरी की तलाश में कारखानों में आने लगे । औद्योगिक नगरों की स्थापना होने लगी । मजदूर का शोषण होने लगा । कारखानों की स्थापना के लिए अधिक पूँजी की आवश्यकता थी । अतः इस नयी व्यवस्था में पूँजीपति का उद्देश्य धन जुटाना और अधिक - से - अधिक लाभ कमाना रह गया । साम्राज्यवाद : सोलहवीं - सत्रहवीं शताब्दी में यूरोप के देशों ने व्यापार की प्रगति के लिए उपनिवेश की स्थापना की थी । एशिया के देशों के साथ व्यापार करने के लिये इन देशों के व्यापारियों ने व्यापारिक कम्पनियों की
MD SHAHWAN SHAHIDI
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