Thursday, January 21, 2021

समाजवाद

 समाजवाद :

 औद्योगिक क्रांति के बाद पूँजीपतियों ने मजदूरों का शोषण करना आरम्भ कर दिया । वे इनसे अधिक काम लेते थे , किन्तु इनको बहुत कम मजदुरी दी जाती थी । स्त्रियों और बालकों से भी बहुत काम लिया जाता था । उनके आवास , उनकी शिक्षा , सुरक्षा , स्वास्थ्य आदि की ओर उद्योगपति ध्यान नहीं देते थे । धीरे - धीरे मजदूरों ने अपनी सुरक्षा के लिये अपना संगठन बनाया । ये संगठन “ मजदूर संघ ' कहलाए । मजदूर संगठन अपने अधिकारों की माँग करने लगे । फ्रांस की क्रांति ने समानता के अधिकार का प्रचार किया था । औद्योगिक क्रांति ने मजदूरों को असहाय बना दिया था । नए उद्योगों के लाभों से वे वंचित रहे । आर्थिक और सामाजिक समानता के बिना राजनीतिक समानता अधूरी थी । इन देशों की सरकारों के द्वारा मजदूरों के हितों की रक्षा के लिये कानून बनाए गए ।

उन्नीसवीं शताब्दी में पूँजीवाद की बुराइयों को समाप्त करने और आर्थिक एवं सामाजिक समानता की स्थापना के लिये कुछ दार्शनिकों और विचारकों ने यह माँग उठाई कि जमीन , कारखानें तथा उत्पादन के सभी साधनों पर जनता का स्वामित्व होना चाहिये । यह विचारधारा “ समाजवादी विचारधारा " कहलाती है । समाजवाद का अर्थ है - आर्थिक और राजनीतिक समानता की स्थापना करना । इसके साथ सामाजिक न्याय स्वतः जुड़ जाता है । इस विचारधारा को लोकप्रिय बनाने का श्रेय कार्ल मार्क्स तथा फ्रेडरिक एंगेल्स को प्राप्त है । दोनों घनिष्ठ मित्र थे और दोनों ने लगभग चालीस वर्षों तक साथ - साथ काम किया था । उनको विश्वास था कि पूँजीवाद के स्थान पर एक नई समाज - व्यवस्था - समाजवाद की स्थापना होगी । इस नई व्यवस्था में उत्पादन के समस्त साधनों पर समाज का सामूहिक स्वामित्व होगा । इन विचारकों के सिद्धान्त के आधार पर अनेक देशों में सामाजवादी संगठनों की स्थापना की गई । कार्ल मार्क्स के सिद्धान्तों से प्रेरित प्रथम सफल क्रांति सन् 1917 ई ० में हुई । 7 नवम्बर , सन् 1917 ई ० को लेनिन के नेतृत्व में रूस में समाजवादी सरकार की स्थापना हुई । इस क्रांति के द्वारा सत्ता तथा आर्थिक उत्पादन के साधनों पर जनता का अधिकार हो गया रूस की सफल क्रांति के बाद अनेक देशों में समाजवादी संगठनों की स्थापना हुई। द्वितीय विश्वयुध्य के बाद यूरोप और एशिया के अनेक देशों में समाजवादी सरकारों की स्थापना की गई।  रूस की क्रांति ने पराधीन देशों के राष्ट्रीय आंदोलन को भी प्रभावित किया। इस तरह हम देखते हैं कि अठारहवीं उन्नीसवीं तथा बीसवीं शताब्दियों के विचारों, घटनाओं आदि ने विश्व के सभी देशों को प्रभावित किया । 



MD SHAHWAN SHAHIDI




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